आज मैं पहली बार मिलिट्री हॉस्पिटल जबलपुर गया|
हेलो दोस्तों नमस्कार
मैं राकेश आप सभी का स्वागत करता हूं आज की एक नई पोस्ट के अंदर मुझे आप सभी को यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मैं कुछ दिन पहले मिलिट्री हॉस्पिटल जबलपुर गया था जिसकी कहानी आज की इस आर्टिकल के अंदर मैं आप सभी को बताने जा रहा हूं
यह बात है माह नवंबर 2022 की जब मैंने और आप सभी भारतीयों ने दीपावली मनाई और यह दीपावली मेरे लिए बहुत बढ़िया रही दीपावली के कुछ दिन बाद ही मुझे अपने मित्र सुनील ने फोन लगाकर कहा कि आप को( मुझे )मिलिट्री हॉस्पिटल जाना है मैं आप सभी को जानकारी के लिए बता दूं कि सुनील ने मुझे ऐसा क्यों कहा क्योंकि सुनील आर्मी में इंजीनियर पोस्ट पर पदस्थ थे और वह इस समय पुणे में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे थे और उनकी माताजी को पैरों तथा घुटनों में अचानक से दर्द होने लगा शायद आप सभी को पता होगा नहीं है तो मैं आप सभी को बता देता हूं कि जो भी व्यक्ति भारतीय सेना में किसी भी पोस्ट पर होते हैं उनके परिवार वालों के लिए हमारी भारतीय सेना के द्वारा सभी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती है जैसे उनके परिवार के लिए शिक्षा स्वास्थ्य और घर में उपयोग होने वाले समस्त वस्तुएं न्यूनतम मूल्यों पर उपलब्ध कराई जाती हैं एक कार्ड बनता है जिसके माध्यम से आर्मी कैंटीन में जा करके आप सामान ले सकते हैं
मुझे सुनील का फोन आता है और मुझे उनके द्वारा यह बताया जाता है कि मुझे उनके माता पिता जी को लेकर मिलिट्री हॉस्पिटल जबलपुर जाना है तो मैंने भी अपने मित्र की बात मानते हुए अगले दिन ही जबलपुर जाने का निश्चय किया क्योंकि मैं एक दो बार जबलपुर जा चुका था तो उन्हें लगा कि मैं उनके साथ जा सकता हूं इसीलिए उन्होंने मुझे जबलपुर जाने के लिए कहा
अगली सुबह लगभग 4:00 बजे मैं उठा और सबसे पहले मैंने अपना मोबाइल चार्ज पर लगाया क्योंकि मुझे दिन भर मोबाइल चलाना था यानी कि मैं दिन भर घर से बाहर रहता इसलिए मैंने मोबाइल चार्ज पर लगाया और मैं फ्रेश होने लगा जैसे आप सभी को पता है दीपावली के बाद मध्यप्रदेश में सर्दियां बढ़ने लगती हैं तो उस दिन की सुबह भी थोड़ी बहुत सर्दी थी उसके पिताजी उनकी दो पहिया वाहन लेकर मेरे घर आ गए मैं भी उनके साथ मोटरसाइकिल पर बैठकर गाडरवारा के लिए रवाना हो गए जहां से हमें ट्रेन में बैठकर जबलपुर जाना था हम सही समय पर स्टेशन गाडरवारा पहुंच गए थे ट्रेन आने में थोड़ी देर थी हम इस यात्रा के दौरान 3 यात्री थे मैं सुनील की माता जी और उनके पिताजी कुछ समय पश्चात ट्रेन आ गई और हम लोग ट्रेन में बैठने लगे क्योंकि सुबह का समय था और सर्दी भी थोड़ी थी तो ट्रेन के दरवाजे बंद थे हमसे दरवाजे नहीं खुल रहे थे पास में ही स्टेशन पर कुछ पुलिसकर्मी खड़े हुए थे हमने उन्हें आवाज लगाई और उन्होंने आकर ट्रेन का दरवाजा खुलवाया तब जाकर हम ट्रेन के अंदर चले कुछ भीड़ थी कुछ दूर तक हमें खड़े होकर ही जाना पड़ा कुछ दूर जाकर ही हमें सीट मिल गई
लगभग सुबह 8:00 बजे हम जबलपुर मदन महल स्टेशन पहुंच गए वहां से हम स्टेशन के बाहर गए और हमने एक ऑटो देखा हमने ऑटो वाले भैया से कहा कि हमें मिलिट्री हॉस्पिटल जाना है उन्होंने कहा 3 व्यक्तियों के ₹100 लगेंगे हमने कहा ठीक है चलिए चलते हैं हम तीनो ऑटो में बैठे और लगभग 4 किलोमीटर की दूरी तय करके मदन महल से मिलिट्री हॉस्पिटल पहुंच गए
सबसे पहले तो हमने देखा वहां जाते हैं हमें इतना शांत माहौल और इतनी स्वच्छता मिली जिसका वर्णन में अपने शब्दों में नहीं कर सकता हूं हम लोग अंदर गए जैसे कि मैंने आपको बताया था कि आर्मी वाले जवानों के घर वालों का एक कार्ड बनता है वह कार्ड हमारे पास था हमने उस कार्ड को अस्पताल में दिखाया फिर हम डॉक्टर से मिले कुछ समय पश्चात हमारा इलाज हो गया था
अब लगभग 12:00 बज चुके थे और हमें भूख भी लग रही थी क्योंकि हम लोग घर से सुबह खाना खाकर नहीं निकली लेकिन हम घर से खाना लेकर आए थे और वही अस्पताल के अंदर एक कैंटीन था जिसमें से हमने कुछ और खाना लिया और हम तीनों लोगों ने मिलकर खाना खाया सुनील के पिताजी को उनके दांतों में कुछ समस्या थी तो हम खाना खाने के बाद डेंटिस्ट यानी कि दांतों के डॉक्टर के पास गए
क्योंकि हम पहली बार मिलिट्री हॉस्पिटल जबलपुर गए थे तो हमें यह पता नहीं था कि डेंटिस्ट 12:00 बजे तक ही मिलते हैं 12:00 बजे के बाद नहीं मिलते हैं वहां जाने के बाद हमें लौट कर आना पड़ा और उनके पिताजी का दांतों का इलाज उस दिन नहीं हो पाया और सुनील की माताजी कि कुछ ब्लड रिपोर्ट 2 दिन बाद मिलती इसीलिए हमने सोचा कि 2 दिन बाद फिर से आएंगे तब दांतों का इलाज करा लेंगे अब लगभग समय हो चुका था 1:00 बजे फिर हमने घर जाने के लिए मोबाइल में ट्रेन देखी
ट्रेन लगभग 2:00 बजे के बाद थी फिर हम लोग लौटकर स्टेशन की तरफ आए रास्ते में हम लोगों सेब और केले लिए और स्टेशन पर बैठकर खाए और ट्रेन आने का इंतजार करने लगे कुछ समय पश्चात ट्रेन आई और हम तीनों लोग ट्रेन में बैठ कर गाडरवारा स्टेशन आ गए वहां से हमने अपना दो पहिया वाहन उठाया और हम अपने घर आ गए यह दिन मेरे लिए बहुत ही अच्छा दिन था क्योंकि मैं अपनी जिंदगी में पहली बार मिलट्री हॉस्पिटल गया था मैं आप सभी को बता दूं वहां पर आम व्यक्ति नहीं जा सकता जिनके परिवार जन या स्वयं व्यक्ति भारतीय सेना में कोई सेवा प्रदान करते हैं वे और उनके परिवार ही वहां जा सकते हैं और यह मेरे लिए बहुत ही अच्छा अवसर था घर आते आते हमें अंधेरा हो चुका था इस तरह हम तीनों खुशी खुशी मिलिट्री हॉस्पिटल जबलपुर गए और हम अपना काम करके खुशी-खुशी अपने घर वापस लौट आए
तो उम्मीद है आप सभी को मिलट्री हॉस्पिटल जबलपुर की यात्रा यह कहानी पढ़कर अच्छा लगा होगा क्या आपके घर में या परिवार में या आपके किसी रिश्तेदार मैं कोई व्यक्ति भारतीय सेना में किसी भी पद पर पदस्थ हैं या फिर आप अपनी जिंदगी में भारतीय सेना में अपनी सेवाएं देना चाहते हैं अपना सुझाव हमें कमेंट के माध्यम से दे सकते हैं हमारी यह पोस्ट पढ़ने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद!

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