सुनील के साथ तक्षशिला कॉलेज जबलपुर की यात्रा
हेलो दोस्तों नमस्कार स्वागत है आप सभी का एक और नए आर्टिकल में| आज के इस आर्टिकल में मैं आप सभी को बताने जा रहा हूं एक बहुत ही रोचक यात्रा के बारे में जो मेरे लिए बहुत ही आनंदमय रही| तो इस कहानी की शुरुआत होती है 6 दिसंबर 2022से | मुझे सुनील का कॉल आता है, शाम के करीब 6/7 बजे|हमारी काफी कुछ बातें होती हैं, बातों ही बातों में जिक्र होता है जबलपुर जाने का|
फिर हमारा निश्चय होता है कि कल सुबह की ट्रेन से हम दोनों जबलपुर जाने वाले हैं जबलपुर जाने का मेन कारण यह था |नौकरी लगने के पहले सुनील जबलपुर में ही पढ़ता था|
उस समय सुनील का एक प्रैक्टिकल रह गया था मैं आपको बता दूं सुनील ने तक्षशिला कॉलेज से इंजीनियरिंग कर रहा था|
तो दोस्तों अब शुरुआत होती है 7 दिसंबर 2022 कि सुबह से` क्योंकि मैं रात में किसी कारण से देर रात को सोया हुआ था तो मुझे अगली सुबह थोड़ी देर में नींद खुली|
जब मेरी नींद ही नहीं खुली थी तब मेरे पास सुनील का कॉल आया कि आपको याद है आज हम जबलपुर जाने वाले हैं| उसने मुझे कॉल करके उठाया क्योंकि इसके पहले एक बार जब वह जबलपुर गया था तब भी हमारी जबलपुर जाने की इच्छा थी लेकिन सुबह जल्दी ना उठन के कारण मैं उस दिन सुनील के साथ जबलपुर नहीं जा पाया था|
मैं सुबह 6:30 उठता हूं क्योंकि इस समय मैं भी पढ़ाई कर रहा था| और कमरे पर मैं और मेरा एक मित्र रहते हैं तो हम दोनों ने कमरे में एक नियम बनाया कि सुबह का खाना मैं यानी (राकेश पटेल), और शाम का खाना मेरे मित्र दीपक कुशवाहा जो कि मेरे साथ रह रहे थे वह बनाते थे|
तो सुबह जल्दी उठकर रूम में बर्तन साफ किए और उस दिन मैंने खाना नहीं बनाया क्योंकि अगर मैं खाना बना था तो मुझे जाने में देरी हो जाती इसलिए मैंने उस दिन रूम में खाना नहीं बनाया|
अब मैं फ्रेश होकर के और तैयार होकर अपने ट्रेन के लिए निकल गया स्टेशन की ओर मेरी ट्रेन का समय 8:30| ट्रेन थोड़ी लेट थी उस दिन और मैं जल्दी निकल गया था तो मैं पैदल ही स्टेशन की ओर चल पड़ा क्योंकि स्टेशन ज्यादा दूर नहीं था|
मैं चलते चलते पैदल पैदल सफर का मजा लेते हुए स्टेशन पहुंच गया ट्रेन अभी भी नहीं आई हुई थी और आने में भी कुछ देर थी| तो स्टेशन पर बैठकर ही मैंने ट्रेन आने का इंतजार किया| कुछ समय पश्चात ट्रेन आ गई मैं ट्रेन में बैठा हूं और अपने मित्र सुनील से मिला जो कि पहले से ही ट्रेन में बैठ कर आ रहे थे| मुझे उनसे मिलकर बहुत खुशी हुई |मैं आप सभी को बता दूं ,मुझे खुशी क्यों हुई क्योंकि सुनील आर्मी में इंजीनियर पोस्ट पर पदस्थ थे| और वह इस बार लगभग 10 महीने में अपने घर आए हुए थे और मैं उनसे घर आने पर पहली बार मिला था| मेरे कहने का मतलब यह है कि मैं सुनील से पूरे 10 महीने बाद मिला था| इसीलिए मुझे सुनील से मिलकर बहुत खुशी हो रही थी|
मैं सुनील के साथ बैठा ट्रेन में क्योंकि सुनील ने पहले से ही मेरे लिए ट्रेन में एक सीट बचा कर रखी थी| इत्तेफाक से उसी ट्रेन में हमारे क्षेत्र के ही निवासी मिले| उनके साथ उनके बच्चे थे| मुझे बच्चों से मिलना, उनके साथ खेलना और उनके साथ बातें करना बहुत अच्छा लगता है| तो मैंने उनकी गुड़िया से उसका नाम पूछा उस गुडया ने अपना नाम बताया| गुड़िया मतलब उनकी बेटी जिसकी उम्र लगभग 4 से 5 वर्ष रही होगी| इसीलिए मैं उसे गुड़िया कह रहा हूं| गुड़िया से बात करने के बाद मुझे यह पता चला कि यह हमारे ही क्षेत्र के लोग हैं| फिर मैंने उसके परिजनों से बात करी मुझे बात करके बहुत अच्छा लग रहा था और उन्हें भी हमसे बात करके बहुत अच्छा लग रहा था| ट्रेन चल रही थी और हम लोग पहुंचे श्रीधाम वहां पर हमने गरमा गरम आलू बड़े लिए और सब लोगों ने मिलकर खाया और हमने उन बच्चों को भी खिलाएं|
फिर हमने उनसे पूछा कि आप कहां जा रहे हैं तो उन्होंने हमें अपने बारे में बताया| वे अपने काम से जबलपुर जा रहे थे और हम अपने काम से जबलपुर जा रहे थे| बातों ही बातों में हमारा सफर और इंतजार कब खत्म हो गया हमें यह पता भी नहीं चला और हम जबलपुर पहुंच गए| वहां पर भी लोग अपने काम से निकल गए और हम अपने काम से स्टेशन के बाहर आ गए| जैसे कि मैं आप सभी को बता चुका हूं, कि सुनील पहले जबलपुर में ही रहकर पढ़ते थे| सुनील का रूम स्टेशन से पास में ही था तो हम लोग उसी रूम में गए और रूम के मकान मालिक से मिले क्योंकि वह हमें जानते थे और सुनील की नौकरी लगने के बाद उन्हें भी हमसे मिलकर बहुत अच्छा लगा| क्योंकि हमें जाना था तक्षशिला कॉलेज जबलपुर प्रैक्टिकल के लिए| लगभग समय हो चुका था 10:00|
हमें 11:00 बजे कॉलेज भी पहुंचना था| उनसे मिलने के बाद हम जबलपुर की ओर निकल गए| थोड़ी ही देर में हम तक्षशिला कॉलेज पहुंच गए| मुझे लगा कि कॉलेज का गार्ड मुझे अंदर नहीं जाने देगा लेकिन गार्ड से पूछने के बाद| गार्ड ने मुझे अंदर जाने की अनुमति दे दी सुनील चले गए कॉलेज के अंदर प्रैक्टिकल देने के लिए|मैं चला गया कॉलेज की कैंटीन में| थोड़ी देर बैठकर आराम करने के बाद मैंने खाना खाया | खाना सुनील के घर से आया था| मैंने खाना खाया और मैं किसी मित्र से फोन पर बातें करके अपना समय व्यतीत करने लगा| कुछ समय बाद मेरे पास सुनील का कॉल आता है, कि मेरा प्रैक्टिकल कंप्लीट हो गया है|
कुछ देर बाद सुनील मेरे पास आते हैं और वह भी खाना खाते हैं| हमारा कॉलेज आने का काम समाप्त हो चुका था और अभी समथिंग 12:00 बज रहे थे| अब हमारे पास आगे का पूरा दिन बचा हुआ था| तो हमने निश्चय किया अब हम घूमेंगे| तक्षशिला कॉलेज के पास में ही एक पहाड़ पर एक पुराना किला था | मैंने अपने मित्र को फोन लगाया और उसे बुलाया| उसका नाम रोहित साहू था| फिर हम तीनों मिलकर उस केले में घूमने गए |
वहां पर बहुत से लोग आते हैं तो जाने में हमें भी बहुत अच्छा लगा| मैं अपने दोस्तों के साथ पहली बार किसी किले में घूमने गया था| वह किला बड़ा होने के साथ-साथ तीन मंजिला पहुंचा था और पहले से ही पहाड़ पर स्थित था| किले के ऊपर चढ़ने के बाद पूरा जबलपुर दिख रहा था |
हमने वहां जाकर अपने मोबाइल में बहुत सारी फोटो निकाली उसके बाद नीचे उतर के किले के आसपास घूमने लगे | वहीं पास में एक मंदिर था पत्थरों के बीच और उस मंदिर में भोलेनाथ शिव शंकर की प्रतिमा रखी हुई थी| वहां घूमने के बाद हमें लगभग 4:00 बज चुके थे| इतने में सुनील को एक काम याद आया कि हमें एक काम और करना है और अब हमारे पास समय नहीं बचा था कि हम वह काम कर सके और हमें भेड़ाघाट भी जाना था| मैंने आप सभी को मेरे मित्र रोहित साहू के बारे में बताया था |जोकि जबलपुर में ही रहकर अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा था |
हम तीनों ने मिलकर यह निश्चय किया कि आज रात हम जबलपुर में ही रुकेंगे| जहां पर हम थे वहां से रोहित के कमरे की दूरी लगभग 8 से 10 किलोमीटर होगी| हमने ऑटो रिक्शा लिया और हम पहुंच गए रोहित के कमरे पर| रोहित के कमरे पर पहुंचते-पहुंचते हमें शाम हो चुकी थी और अंधेरा भी लग चुका था फिर हमने जाकर फ्रेश हुए| हम तीनों ने मिलकर खाना बनाया हमने रास्ते से एक फूलगोभी ले ली थी और बाकी की सब्जी रोहित के कमरे में पहले से ही थी|
हम तीनों ने मिलकर फूल गोभी की सब्जी बनाई और रोटियां बनाई तीनों ने मिलकर खाना खाया| खाना खाने के बाद हमने आराम किया क्योंकि हम सुबह से निकले थे और घूमते घूमते थक चुके थे|
मित्रों जाने की कहानी मैंने आप सभी को बता दी है| इसके आगे भी कहानी है जो कि अभी खत्म नहीं हुई है, यह सिर्फ 1 दिन की कहानी थी अगर आपको हमारी आगे की कहानी पढ़नी है तो आगे वाले आर्टिकल में आप जा सकते हैं
तो मुझे उम्मीद है हम तीनों मित्रों की कहानी पढ़कर आपको बहुत अच्छा लगा होगा...!






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