आज दिनांक 25 दिसंबर 2022 को हम चर्च गए क्रिसमस देखने
हेलो दोस्तों
नमस्कार स्वागत है आप सभी का फिर से एक नए आर्टिकल के अंदर आज के इस आर्टिकल के अंदर मैं आप सभी के साथ साझा करने जा रहा हूं की आज हम गए चर्च घूमने के लिए क्रिसमस देखने के लिए मेरे 1 दिन की कहानी जिसे आप मेरी दिनचर्या भी कह सकते हैं और मैंने इस कहानी में मेरी बहुत ही रोचक बातें बताऊंगा और आप सभी को पढ़कर अच्छा लगेगा तो चलिए शुरू करते हैं
तो मित्रों यह बात है 24 दिसंबर 2022 रात की जैसा कि हमने अपने दिल के सारे काम करते हुए रोज की तरह अपने रूम में शाम का खाना बनाया खाना खाया और हम पढ़ाई करके सोने ही वाले थे मैं आप सभी को पहले ही बता दूं कि कल यानी 25 दिसंबर 2022 क्रिसमस को देखने जाने के लिए हम तीनों मित्र मैं( राकेश) दीपक और रोहित कुछ दिन पहले ही निश्चित कर लिया था कि हम क्रिसमस देखने जाएंगे
मित्रों मैं आप सभी को बता दूं 24 दिसंबर 2022
की रात हम अपनी पढ़ाई करने के पश्चात लगभग 10:00 बजे सो जाते हैं लेकिन इस रात हमें नींद नहीं आ रही थी पता नहीं क्यों पर हमें नींद नहीं आ रही थी कुछ समय टाइम पास करने के बाद हमें लगा कि हमें नींद आ जाएगी? पर फिर भी नींद नहीं आ रही थी फिर मैंने सोचा कि कुछ खाया जाए पर हमारे कमरे में खाने के लिए कुछ भी नहीं था रात भी ज्यादा हो चुकी थी फिर मैंने निश्चय किया कि मार्केट से कुछ लाकर खाया जाए मैं कमरे से बाहर निकला और मार्केट गया मार्केट हमारे कमरे के पास ही था क्योंकि रात ज्यादा हो चुकी थी और सारी दुकानें बंद भी हो गई थी यह बात है लगभग रात 12:00 बजे की मुश्किल से एक दुकान हमें खुली मिली और वहां से मैंने कुरकुरे और बिस्किट लिए और मैं अपने कमरे में आया दीपक और मैंने मिलकर बिस्किट और कुरकुरे खाएं और लगभग रात के 3:00 बजे हम दोनों को नींद आई
आज दिन 25 दिसंबर 2022 था
मैं और दीपक तो नरसिंहपुर में ही रहते हैं लेकिन मेरा पुराना मित्र रोहित साहू जबलपुर में अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई करने के लिए जबलपुर में ही रहता है और अभी दिसंबर में शीतकालीन अवकाश के चलते वह अपने घर आ रहा था वह भी नरसिंहपुर से कुछ दूरी पर उसके गांव में ही रहता है हम तीनों का निश्चय हुआ कि हम तीनों क्रिसमस देखने के लिए जाएंगे रोहित जबलपुर से आता है रोहित को जूते लेने थे मैं और रोहित नरसिंहपुर के बाजार से जूते लेकर अपने रूम चले जाते हैं
वहां पर हाथ पैर धोकर फ्रेश होते हैं अभी लगभग शाम हो चुकी थी और आज हमने अपने कमरे में शाम का खाना नहीं बनाया क्योंकि आज हम जाने वाले थे चर्च क्रिसमस देखने के लिए हम पिछले साल भी गए थे और हमें पता है वहां भंडारा होता है सुबह बने हुए दाल चावल रखे हुए थे मुझे और रोहित को थोड़ी भूख लग रही थी तो मैंने सुबह के दाल चावल गर्म करें और रोहित और मैंने मिलकर खाएं😂😂🤣🤣
इसके बाद हम तीनों तैयार होकर चर्च के लिए निकले दोस्तों मैं आप सभी को बता दूं मेरे कमरे से चर्च की दूरी लगभग 2 किलोमीटर थी और हम तीनों पैदल ही चर्च के लिए निकल गए आज रोड पर कुछ भीड़ थी क्योंकि हमारे जैसे लोग चर्च जा रहे थे और कोई आ रहे थे कुछ समय बाद हम लोग चर्च पहुंचे
वहां पर काफी लाइटें लगी हुई थी और सजावट भी काफी अच्छी हो रखी थी और माहौल भी काफी अच्छा था चर्च रोड के साइड में ही था इसीलिए रोड पर भीड़ थी हम भीड़ में से निकल कर चर्च की साइड पहुंचे और साइड में ही भंडारा चल रहा था हम तीनों लाइन में लगे प्लेट ली और प्लेट में खाना लिया और फिर से निकल के हम तीनों ने खाना खाया यहां इसे हम चर्च का प्रसाद भी कह सकते मैं और रोहित दोनों का पेट एक बार में ही भर गया था लेकिन हमारे साथी मित्र दीपक का एक बार और खाना लेने की इच्छा थी तो उसने लिया और खाया मैं आप सभी को बता दूं आज हमें चर्च में प्रसाद के रूप में पूरी सब्जी और सूजी का हलवा मिला जो कि काफी बढ़िया था
इसके बाद हम चर्च के अंदर गए जैसा कि मैंने बताया चर्च में भीड़ थी काफी सारे लोग शहर के कोने-कोने से चर्च देखने के लिए आए थे आपको शायद याद होगा कि मैंने अभी आपको यह बताया था कि रोहित के लिए हमने आज बाजार से नए जूते लिए थे और चर्च में भीड़ थी तो हमें शंका थी अगर हमने जूते उतारे और चोरी हो गए तो ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मेरे साथ ऐसा 2 बार हो चुका है इसलिए मैंने रोहित को और हम तीनों ने जूते ना उतारने का निश्चय किया
साइड में एक खिड़की थी या एक छोटा सा दरवाजा हम कह सकते हैं जहां से हम झांक कर चर्च के अंदर सजी हुई झांकी को देख सकते थे हमने ऐसा ही किया और उसके साइड में बहुत अच्छी चीज है थी और बहुत ही सजावट थी हम तीनों ने वहां आनंद करते हुए उस माहौल का आनंद लिया और वही पर हमें अपने एक मित्र मिले उनसे कुछ बातें करी कुछ फोटो निकालें जो आपके साथ साझा कर रहे हैं आप देख सकते हैं
इस तरीके से देखते हुए और चर्च के माहौल का आनंद लेते हुए हम तीनों चर्च से बाहर आए अब हमने चर्च तो देख लिया था अब हमें अपने कमरे पर वापस जाना था और समय भी ज्यादा नहीं हुआ था लगभग 8:30 हो रहे होंगे हम रोड पर चलते हुए अपने रूम की तरफ आ रहे थे वही साइड में एक हॉस्टल था यह वही हॉस्टल था जहां पर मैं और रोहित बीते कुछ साल यहीं रुके थे अपनी पढ़ाई करने के लिए तो हमने सोचा हमें हॉस्टल जाना चाहिए लेकिन जैसे ही हम हॉस्टल के गेट पर पहुंचे वहां ताला लगा हुआ था फिर हमें याद आया कि अभी तो शीतकालीन अवकाश चल रहा है तो सभी हॉस्टल वासी अपने अपने घर गए होंगे
उसी रास्ते हम आगे चले रास्ते में एक शिल्प मेला लगा हुआ था हम उसके अंदर गए वहां पर काफी सारी चीजें थी जैसे कि कपड़े की दुकान, बर्तन की दुकान, सजावट के सामान की दुकान, बच्चों के लिए मिकी माउस, वोटिंग, रेलगाड़ी, झूला, बलून शूटिंग इत्यादि काफी सारी चीजें वहां पर थी
मेले का आनंद लेते हुए हम लोग मेला घूम कर बाहर आए जैसे कि हम तीनों का पहले ही निश्चय हो गया था कि हम अगर चर्च गए तो हम आते समय एक राजस्थानी मिष्ठान भंडार मैं तीनों मिलकर रबड़ी खाएंगे तो हम अंदर गए और हम तीनों ने मिलकर रबड़ी खाई इस तरीके से आनंद करते हुए हम अपने कमरे की तरफ आ चुके थे
हम कमरे में अंदर गए फ्रेश हुए जैसा कि मैंने आप सभी को पहले ही बता दिया था कि हमारे कमरे से चर्च की दूरी लगभग 2 किलोमीटर होगी हम घूमते घूमते पैदल ही गए थे और घूमते घूमते पैदल ही अपने कमरे में आए तो हम तीनों काफी थक चुके थे हम तीनों ने आज के दिन जो भी कार्य किए जो भी देखा उससे संबंधित कुछ बातें करें और हम थक गए थे तो हमें नींद भी जल्दी आ गई इस तरीके से यह है यादगार दिन समाप्त हो चुका था
तो दोस्तों उम्मीद है आप सभी को यह कहानी 25 दिसंबर 2022 की मेरी दिनचर्या हम लोग गए चर्च घूमने आप सभी को अच्छी लगी होगी क्या आप कभी चर्च गए हैं या जाना चाहते हैं या जाने का सोच रहे हैं या आप कभी गए हैं तो आपको वहां जाकर कैसा लगा आप अपना अनुभव हमें कमेंट के माध्यम से साझा कर सकते हैं हमारी आज की कहानी पढ़ने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद









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