मेरी यात्रा (13/07/2020)
मेरी यात्रा( दिन सोमवार)
जैसा आप सभी को पता है कि मैं एक विद्यार्थी हूं मुझे जैसे ही कल दिनांक 12/ 7/ 2020 को पता चला कि मुझे मेरे अपने विद्यालय जाना है मुझे अपने शुल्क जमा करना है और अपनी पुस्तकें लेना है जिससे कि मैं आगे अध्ययन कर सकूं तू मुझे अपने विद्यालय से सूचना प्रदान की गई कि सभी विद्यार्थियों को 13,7,2020 को विद्यालय आकर अपना कार्य पूर्ण करना है
नमस्कार मित्रों आप सभी का हमारे इस ब्लॉग पोस्ट पर बहुत-बहुत स्वागत है मित्रों आज के पोस्ट पर मैं आपको अपनी एक यात्रा वृतांत के बारे में बताना चाहता हूं जैसा कि मैंने आप सभी को थोड़ी सी जानकारी दी हुई थी ऊपर कि मैं एक विद्यार्थी हूं और 1 विद्यार्थियों को अपने घर से दूर विद्यालय होने पर कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है तो मैं आप सभी को बता दूं आज मैं सुबह प्रातः काल 6:00 बजे उठ गया था उठने के बाद मैंने अपना नित्य कार्य पूरा किया करने के कुछ समय पश्चात मैं अपने पड़ोसी के घर कुछ समय व्यतीत करने गया उसके बाद मुझे याद आया कि मुझे अपने विद्यालय भी जाना है जब तक कि 8:30 बज चुके थे मैंने समय का ध्यान रखते हुए नहा धोकर खाना खाकर फ्रेश हुआ और मेरे कुछ कागजात तैयार की है और मैं उन्हें अपने स्कूल बैग में रखकर निकलने ही वाला था तभी अचानक से मेरे बड़े भाई श्री राम कुमार पटेल ने मुझे अवगत कराया कि मेरे सभी कागजातों में से एक और रात में कोई कमी है जिस कमी के कारण मुझे अपने विद्यालय में कष्ट भी आना पड़ सकता है इसका निवारण कराने के लिए मुझे अपने ब्लॉक बाबई चीचली में लोक सेवा केंद्र जाकर समस्या का विधान कराया था इस समस्या के चलते मैं बहुत लेट हो चुका था काफी समय होने के पश्चात मैं लगभग 11:15 बजे अपने दो पहिया वाहन हौंडा सी बी शाइन 8986 लेकर अपने काम के लिए निकल पड़ा मित्रों मैं आप सभी को बता दूं मैं सफर में अकेला था कोई मित्र सहपाठी भाई बहन घर वाले मेरे साथ नहीं थे मैं अकेला था और यह पहली बार था कि मैं अपने स्वयं के दो पहिया वाहन से नरसिंहपुर अपने रास्ते लेकर इस रास्ते के सफर में एकदम अकेला जैसे ही मैं बाबई चीचली पहुंचा मैंने एक फार्म खरीदा उस फॉर्म उस फार्म में अपनी सभी जानकारी भरने के पश्चात लोक सेवा अधिकारी को मैंने वह फोरम दे दिया उन्होंने मुझे कुछ समय बैठने के लिए कहा वहां पर काफी भीड़ लग चुकी थी
मैंने कुछ समय इंतजार करने के बाद उनसे कहा मुझे अपने विद्यालय पहुंचकर बहुत सारे काम करवाने बाकी है पर उन्होंने मेरी इस समस्या को ना समझते हुए काफी समय बर्बाद कर दिया एक बार तो मेरा मन हुआ कि आज लौट कर मैं वापस घर चला जाऊंगा लेकिन मैंने सोचा कि मैं कल जा फिर से आऊंगा तुम मुझे बहुत पैसे का नुकसान हो सकता है जो कि मैं आज लगा चुका हूं फिर मैंने सोचा कि मैं आज ही अपने विद्यालय जाऊंगा और अपना काम पूरा करूंगा मित्रों मैं आपको बता दूंगा आप मुझे काफी समय बीत चुका था तभी अचानक से उस कार्यालय की बिजली चली गई जिससे कि सारे काम रुक गए और मैंने सोचा कि अब मैं अपने विद्यालय बिना काम कराए ही चला जाऊंगा मुझे इस बात का डर लग रहा था कि मैं सही रहूंगा या गलत पर मैंने किसी बात की परवाह न करते हुए अपने रास्ते पर निकल पड़ा तभी अचानक से मेरे बड़े भाई श्री राम कुमार पटेल का फोन आया मैंने उन्हें सारी समस्या बताई उन्होंने कहा ठीक है कोई बात नहीं मैं यहां चीचली बाबई से लगभग 1:30 बजे निकला था
मुझे बहुत लंबा सफर तय करने के बाद जब मैं नरसिंहपुर पहुंचा तो मुझे वहां पर 3:00 बज चुके थे मैंने जाकर वहां पूछताछ की कि मेरा काम एक व्यस्क शिक्षक द्वारा किया जाएगा मुझे अपने पिछले शिक्षक श्रीमती मधु पटेल मैं उनसे जानकारी करने के पश्चात मुझे पता चला कि 11वीं सी कक्षा के कक्षा शिक्षक श्री एचडी द्वारा मेरा काम किया जावेगा मैंने फटाफट से अपने काम को पूरा किया जिसमें कि मुझे 1345 रुपए जमा किए और अपनी पुस्तकें लेकर मैं वापस अपने घर की ओर निकल पड़ा मित्रों काफी देर होने के बाद अब मुझे भूख भी लग चुकी थी जैसे जैसे मैंने दो पहिया वाहन होंडा सीबी शाइन 8986 जो की एक नई गाड़ी थी और चलाने में काफी मजा भी आ रहा था लेकिन मेरी भूख बढ़ती जा रही थी क्योंकि मुझे लगभग 4:30 बज चुके थे मैंने करेली शहर में एक चौराहे पर एक मंदिर के सामने अपनी गाड़ी रोक कर मैं जो घर से खाना ले गया था मैंने खाना खाया पानी पीने के बाद मैं फिर से
अपने रास्ते चल पड़ा इस रास्ते में मेरे एक मित्र का घर पड़ता है जो कि मेरा एक छात्रावास मित्र है उसी के गांव में और भी मित्र रहते थे लेकिन वह कुछ खास नहीं थे काफी दिक्कतों के बाद मैं उस मित्र के घर पहुंचा जिसका नाम निवेश बर्मा था मित्रों मित्र के घर पहुंचते ही उसके घरवालों से मेरी थोड़ी बातचीत हुई चाय नाश्ता हुआ और मैं अपने घर के लिए निकलने वाला था अब मुझे रास्ते में शाम होने वाली थी जिस रास्ते में चल रहा था वह रास्ता मेरे लिए बिल्कुल नया और अनजान था लेकिन मैं चलता गया और अपनी मंजिल तक पहुंच गया फिर मैं गाडरवारा पहुंचा गाडरवारा से अप ग्राम ब** शुरू पहुंच गया मित्रों मैं आपको एक बात बताना भूल गया इस दौरान मेरे मित्र नरेश वर्मा ने कुछ आम मेरे स्कूल बैग में रख दिए मुझे बहुत अच्छा लगा उसके घर जाकर उसके घरवालों से मिलकर और मित्रों जब मैं घर पहुंचा तो मुझे घर पहुंचने पर अंधेरा लग चुका था मैं अपने घर एकदम सही सलामत पहुंच गया
यह मेरी आज की यात्रा मंगल में रही और मैं सही सलामत अपने घर पहुंच गया तो मित्रों यह पोस्ट आप सभी को कैसी लगी आप हमें जरूर बताएं यह पोस्ट पढ़ने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद मित्रों जैसा कि मैं आप सभी को बता चुका हूं पहले ही कि मैं एक स्मॉल यूट्यूब पर हूं जिसकी लिंक मैं नीचे दे दूंगा आप जाकर मेरी वीडियोस यूट्यूब पर देख सकते हैं तो आज के लिए इतना ही मिलते हैं अगली पोस्ट में धन्यवाद
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